
छतरपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही गेहूं खरीदी के बीच शनिवार को मण्डी प्रांगण स्थित स्वामी विवेकानंद विपणन सहकारी समिति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। शिकायत मिलने पर एसडीएम प्रशांत अग्रवाल और तहसीलदार पियुष दीक्षित राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे, जहां जांच के दौरान गड़बड़ी उजागर हुई।
जानकारी के अनुसार, शारदा पटेल नामक व्यक्ति प्रहलाद पटेल नाम के किसान के पंजीयन पर गेहूं बेच रहा था। नियमानुसार जिस किसान के नाम पर पंजीयन हो, उसी को स्वयं उपस्थित होकर उपज बेचनी होती है, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी करते हुए दूसरे व्यक्ति द्वारा गेहूं बेचा जा रहा था।
मौके पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने करीब 50 क्विंटल गेहूं जप्त कर लिया और संबंधित किसान का पंजीयन निरस्त कर दिया। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
मण्डी में गड़बड़ियों की शिकायतें बढ़ीं
जिले में शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए लगभग 80 केन्द्र बनाए गए हैं, जिनमें से 3 केन्द्र छतरपुर मण्डी प्रांगण में संचालित हैं। इनमें दो सरकारी समितियां और एक निजी स्वामी विवेकानंद विपणन सहकारी समिति शामिल है।
हालांकि, मण्डी प्रांगण के खरीदी केन्द्रों पर किसानों के साथ अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। शासन द्वारा तुलाई निशुल्क किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में किसानों से प्रति क्विंटल 25 रुपये रसीद शुल्क और 6 रुपये तुलाई शुल्क के नाम पर वसूली की जा रही है।
व्यापारियों की सक्रियता पर उठे सवाल
खरीदी केन्द्रों पर किसानों की बजाय व्यापारियों की सक्रियता भी संदेह के घेरे में है। आशंका जताई जा रही है कि कई मामलों में व्यापारियों का गेहूं किसानों के पंजीयन के माध्यम से खरीदा जा रहा है। खरीदी में देरी के कारण किसान खुले बाजार में अपनी उपज बेच चुके हैं, जिसका लाभ अब व्यापारी उठा रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
जिला मुख्यालय स्थित खरीदी केन्द्रों में ही इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के केन्द्रों की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन ऐसे मामलों में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
अधिकारी का बयान
एसडीएम प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की गई है। “शारदा पटेल द्वारा प्रहलाद पटेल के पंजीयन पर गेहूं बेचा जा रहा था, जिसे पकड़कर गेहूं जप्त किया गया और पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। नियमानुसार संबंधित किसान को स्वयं उपस्थित होना आवश्यक है। मामले की जांच जारी है।”
